Tuesday, March 11, 2014

अब चरम पे खड़ा धर्म युद्ध

अब चरम पे खड़ा धर्म युद्ध
हो शंखनाद रण की पुकार ।
जब शोर करें ये दैत्य सारे
तब हृदय छले तेरी हुंकार ।

बलवान बनाता देश तुझे
पर धर्म बनाता तुझे अमर ।
कठिनाई बढ़ने वाली है
तू शांत चित्त हो कस कमर ।

इस बार युद्ध मायावी है
भरपूर हो रहा छल कपट ।
तू रहा सत्य की बाँह थाम
इस बल से शत्रु से निपट ।

शत्रु तेरे हैं तीन तरफ
पहले कांग्रेसी प्रतिद्वंद ।
फिर सेना खड़ी विभीषण की
आखिर अमरीकी प्रतिबंध ।

यही क्रम है तेरे शत्रु का
इसी क्रम में इन पर वार कर ।
हों दृष्य या अदृष्य रहें
जनता संग इनका संहार कर ।

कुछ बातों का तुझे हो स्मरण
ये युद्ध नहीं तेरा निजी रण ।
ये युद्ध धर्म का, भारत का
सच पर अडिग यही तेरा प्रण ।

तूने अच्छा नेतृत्व दिया
बढ़ कर आगे मन जीत लिया ।
डूबे जाते थे जब ये दिल
नई किरण दिखा मनमीत दिया ।

जहाँ अंधकार गहरा फैला
कर दिया उजाला दीप जला ।
विचलित मूर्छित जो बैठे थे
हिंदुस्तानी उठ खड़ा चला ।

वो चला चला नहीं बैठेगा
मिला जोश नया उसे जीवन का ।
अब धूर्त मायावी पैठेगा
हमें होश मिला उसके मन का ।

होंगी भारत में कमीं कई
क्या कोस कोस कर बात बनी?
साकारात्मक जब सोचा तब,
समृद्ध शक्ति की साख जमी ।

ये सोच मिली है मोदी में
है जनता का यही प्रतिनिधी ।
बढ़ना है आगे भारत को तो
यही बची अब सफल विधी ।

मतदान पड़ेगा अभूतपूर्व
जनता में ऐसा रोष जगा ।
जब गिनती होगी वोटों की
रणबाँका बस मोदी होगा ।

तैयार रहो अब मोदी जी,
आता है शपथ ग्रहण का दिन ।
हो जीत तुम्हारी ऐसी कि
हमें याद रहे ये रण का दिन ।