Friday, October 4, 2013

कोर्ट मार्शल

This poetry has been written by some soldier. Not me. And it express the deep anguish, the dilemmas, the demoralization that a soldiers go through regularly. It shook me. I can tell you, it'll shake you too.


आर्मी कोर्ट रूम में आज एक केस अनोखा अड़ा था
छाती तान अफसरों के आगे फौजी बलवान खड़ा था

बिन हुक्म बलवान तूने ये कदम कैसे उठा लिया
किससे पूछ उस रात तू दुश्मन की सीमा में जा लिया

बलवान बोला सर जी!ये बताओ कि वो किस से पूछ के आये थे
सोये फौजियों के सिर काटने का फरमान,कोन से बाप से लाये थे

बलवान का जवाब में सवाल दागना अफसरों को पसंद नही आया
और बीच वाले अफसर ने लिखने के लिए जल्दी से पेन उठाया

एक बोला बलवान हमें ऊपर जवाब देना है
और तेरे काटे हुए सिर का पूरा हिसाब देना है

तेरी इस करतूत ने हमारी नाक कटवा दी
अंतरास्ट्रीय बिरादरी में तूने थू थू करवा दी

बलवान खून का कड़वा घूंट पी के रह गया
आँख में आया आंसू भीतर को ही बह गया

बोला साहब जी! अगर कोई आपकी माँ की इज्जत लूटता हो
आपकी बहन बेटी या पत्नी को सरेआम मारता कूटता हो

तो आप पहले अपने बाप का हुकमनामा लाओगे ?
या फिर अपने घर की लुटती इज्जत खुद बचाओगे?

अफसर नीचे झाँकने लगा
एक ही जगह पर ताकने लगा

बलवान बोला साहब जी! गाँव का ग्वार हूँ बस इतना जानता हूँ
कौन कहाँ है देश का दुश्मन सरहद पे खड़ा खड़ा पहचानता हूँ

सीधा सा आदमी हूँ साहब ! मै कोई आंधी नहीं हूँ
थप्पड़ खा गाल आगे कर दूँ मै वो गांधी नहीं हूँ

अगर सरहद पे खड़े होकर गोली न चलाने की मुनादी है
तो फिर साहब जी ! माफ़ करना ये काहे की आजादी है

सुनों साहब जी ! सरहद पे जब जब भी छिड़ी लडाई है
भारत माँ दुश्मन से नही आप जैसों से हारती आई है

वोटों की राजनीति साहब जी लोकतंत्र का मैल है
और भारतीय सेना इस राजनीति की रखैल है

ये क्या हुकम देंगे हमें जो खुद ही भिखारी हैं
किन्नर है सारे के सारे न कोई नर है न नारी है

ज्यादा कुछ कहूँ तो साहब जी ! दोनों हाथ जोड़ के माफ़ी है
दुश्मन का पेशाब निकालने को तो हमारी आँख ही काफी है

और साहब जी एक बात बताओ
वर्तमान से थोडा सा पीछे जाओ

कारगिल में जब मैंने अपना पंजाब वाला यार जसवंत खोया था
आप गवाह हो साहब जी उस वक्त मै बिल्कुल भी नहीं रोया था

खुद उसके शरीर को उसके गाँव जाकर मै उतार कर आया था
उसके दोनों बच्चों के सिर साहब जी मै पुचकार कर आया था

पर उस दिन रोया मै जब उसकी घरवाली होंसला छोड़ती दिखी
और लघु सचिवालय में वो चपरासी के हाथ पांव जोड़ती दिखी

आग लग गयी साहब जी दिल किया कि सबके छक्के छुड़ा दूँ
चपरासी और उस चरित्रहीन अफसर को मै गोली से उड़ा दूँ

एक लाख की आस में भाभी आज भी धक्के खाती है
दो मासूमो की चमड़ी धूप में यूँही झुलसी जाती है

और साहब जी ! शहीद जोगिन्दर को तो नहीं भूले होंगे आप
घर में जवान बहन थी जिसकी और अँधा था जिसका बाप

अब बाप हर रोज लड़की को कमरे में बंद करके आता है
और स्टेशन पर एक रूपये के लिए जोर से चिल्लाता है

पता नही कितने जोगिन्दर जसवंत यूँ अपनी जान गवांते हैं
और उनके परिजन मासूम बच्चे यूँ दर दर की ठोकरें खाते हैं

भरे गले से तीसरा अफसर बोला बात को और ज्यादा न बढाओ
उस रात क्या- क्या हुआ था बस यही अपनी सफाई में बताओ

भरी आँखों से हँसते हुए बलवान बोलने लगा
उसका हर बोल सबके कलेजों को छोलने लगा

साहब जी ! उस हमले की रात
हमने सन्देश भेजे लगातार सात

हर बार की तरह कोई जवाब नही आया
दो जवान मारे गए पर कोई हिसाब नही आया

चौंकी पे जमे जवान लगातार गोलीबारी में मारे जा रहे थे
और हम दुश्मन से नहीं अपने हेडक्वार्टर से हारे जा रहे थे

फिर दुश्मन के हाथ में कटार देख मेरा सिर चकरा गया
गुरमेल का कटा हुआ सिर जब दुश्मन के हाथ में आ गया

फेंक दिया ट्रांसमीटर मैंने और कुछ भी सूझ नहीं आई थी
बिन आदेश के पहली मर्तबा सर ! मैंने बन्दूक उठाई थी

गुरमेल का सिर लिए दुश्मन रेखा पार कर गया
पीछे पीछे मै भी अपने पांव उसकी धरती पे धर गया

पर वापिस हार का मुँह देख के न आया हूँ
वो एक काट कर ले गए थे मै दो काटकर लाया हूँ

इस ब्यान का कोर्ट में न जाने कैसा असर गया
पूरे ही कमरे में एक सन्नाटा सा पसर गया

पूरे का पूरा माहौल बस एक ही सवाल में खो रहा था
कि कोर्ट मार्शल फौजी का था या पूरे देश का हो रहा था ?

49 comments:

  1. Tears are flowing down my eyes as I reae and re read this poem by an unknown soldier. My thoughts go back to Atalji and to day I look to Narendrabhai to redeem the pride of my mother. Ganesh

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    1. same with me its really sad,hamare appno ne hi hath band rakhe hai warna kya mazal kisi ki...

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    2. dear friend not writen by an unknown soldier... its composed by me
      https://www.facebook.com/chahalramesh

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    3. Dear Ramesh Bhai,
      It is a great poem. I am sure everyone who has read it must have filled his eyes with tears. It is an irony that our soldiers are fighting rather struggling with tied hands. Not only they have Pakistanis against them, even the politicians & boneless officers do everything to demoralize them. No words to express how I have felt after reading this legendry but sad story about our brave army people.

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  2. Well written.........

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  3. Country stands behind you, not these politicians! We can never pay our soldier's dept.

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    1. wowwwwwwww awesome poem... must read by our current PM he should feel ashamed.. our democracy should feel ashamed .. too gud ..

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  5. Now a days we get rarest of rare moments to feel proud of being Indian, this is surely one of them. Salute to the brave soldier.

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  6. we all should raise voice and stand along to make him real respectful soldier

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  7. Nice line to show the reality of Indian Politics and corrupted system.

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  8. Ultimate Piece of poetry Bro....!!!!
    #respect for all such patriots.

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  9. Truly heart touching. Jai jawan...

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  10. I am speechless................. my heart is crying

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  11. Thanx to soldier...
    govt. should be changed..

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  12. जीवन में पहली बार कोई कविता पढ़ कर आंसू आये हैं...!

    बहुत पहले एक प्रण लिया था, खुद को भी बदलूँगा और अपने जैसा एक और बना दूंगा.......अभी खुद को बदल रहा हूँ....हर वो काम जो गलत है बंद कर दिया है, गलत के खिलाफ खड़े हो कर लड़ता हूँ, कमजोरो की मदद करता हूँ, अकेला जितना कर सकता हूँ करता हूँ, धीरे धीरे लोग जुड़ने शुरू हो गए हैं, इश्वर ने चाहा तो बहुत कुछ बदल देंगे... और ऐसे हालत बदलेंगे की एक भाई को दुसरे भाई का कटा सर न देखना पड़े.....!

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  13. our impotent....spineless....and coward politicians should read this....

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  14. Ek aise Karvi Sachai....aur bahut hi ache tareke se is sabdon mein sanjoya gaya.......Ankoh se aanson roke nahi rooke
    .Jai Hind

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  15. bhav bibhor ho gaya ye kavita padh kar

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  16. This is the usual and pathetic story of most of government offices where senior beurocrats neither lead nor protect junior officer who honestly discharge their duty

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  17. Shameful govt led by the weakest person of the world mand maun sin.

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  18. awesummm lines bhaai!!!
    dhanyawaad bhai ye kavita humaare saath baantne k liye..:) main chahta hun ye kavita desh ka baccha baccha sune...or kameene manmohan k kaan me b ye kavita pahunche...:/ sharam aati h mujhe aaj apne desh ka pradhaanmantri dekh kar..thoo h us atyaachaari par..:(
    main is kavvita ko share karnuga bhai or jyaada se jyaada logon ko sunaane ki koshish karunga.. :)

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  19. My brother is serving in Indian Army, after reading this i have asked him to leave this job and come back to home, its not because i am scared of loosing him, its because i dont want my brother to do SUICIDE there. This is first time when a gov is playing with Nation's security, because we have a Spineless Fictitious PM and a Italian BITCH.

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  20. What a beauty of words...
    I have never seen such a fire before.

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  21. Jai Jawan..Jai Hind.....Down Down Congress Party..Down down..Italian rule

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  22. heart touching poem....speechless.....we all are responsible for this condition..still have a time to change....wake up India and start thinking beyond your own self interest..........

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  23. Heart Touching Reality !! The Politicians must stop politics on our brave soldiers/army and show some respect towards them and their families..

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  24. This is a portion of truth. In court of enquiry or court martial, they use pencil instead of pen to wipe the truth as explained by the soldier, as in the above poem. Still our shameless politicians will worry only for their bank balance instead of the repeated invasion by the Pakistan / China / Bangladesh army or militants. They are the only Indians who smile & feel pleased when the dollar crushes the rupee so brutally.

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  25. real picture of our army

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  26. This poem depicts actual picture of the contemporary status of our army.

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  27. I do not know the origin of this heart breaking poem but I received the same one on my FB profile on 01.10.13. Our head hangs down because we r reponsible for selecting our politicians and they have proved to be termites eating whole country. I have faith in NaMo as one thing is sure, he is real patriot. To do something worthy, he must be in power and to achieve power, he is following the niti of sam,dam,dand and bhed which is 101% OK as per me.

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  28. our defance miniestry is coward because defance minster is nothing kaow about defance they just know how to get comision out of defance contract.

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  29. Very nice poem a true story hume aapno ne luta gairo me khan dam tha aapni kisti dubi vahian jahain pani kam tha

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  30. Subhash D. KothalkarOctober 10, 2013 at 6:52 AM

    In fact the virtue of respecting a "Soldier" should be inculcated in the children during their schooldays as students. Then the impact may be worthwhile & as desired. The children grasp good things with open heart. Our curriculum should include lessons in this regard.

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  31. kash ki apki is bat ko wo bhi samjh pate jo uper se baith kar ye order dete hai

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  32. IT IS TRUE, THE JAWANS ARE WINNING THE WAR AND POLITICIONS ARE LOOSING IT FOR VOTES.NOW THIS DEMOCRACY IS OF NO USE

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  33. Unfortunate but true.
    This situation has been there since the first war of 1947.
    We and the establishment have treated our soldiers rather shabbily. Till 2011 the monthly pension for Param Veer Chakra winners was 1500/- !! it has been revised to Rs. 10,000/- since then.
    Our politicians are singularly responsible for two of the biggest tragedies - China war 1962 and the IPKF debacle in Sri Lanka.
    Despite lacking facilities and support like other countries of India's stature our soldiers have given their everything to defend this country.
    We have failed them.

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  34. Two of our biggest tragedies - the China war 1962 and IPKF in Srilanka were the result of ham handed politicians trying to play act as Generals.
    Unfortunately our soldiers have always given their all to defend this country.
    The political and bureaucratic establishment has been insensitive and
    WE have failed them.

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  35. Mr. thinker i m not a soilder. m a civil person. bt shocket ke ap ne writer ke bare me sirf itna kah k kam chla diya.... brother its composed by me . bt shocked ke apne mera nam nhi likha... hope ke future me dhyan rkhoge. jai hind

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    1. Ramesh ji,

      I have only received it without any Poet's name and with a reference that it is written by some ex-Fauji, through my Brother's Fauji Network.

      I don't know why you are shocked, therefore, that your name is not reflecting. I couldn't have dreamed your name. Pls also note that I have been categorical that this is not my work. So, my intention is clearly honest.

      That said, whenever you prove it to me that you are the poet who has written this wonderful poetry, I will mention your name without hesitation. I can always edit my posts.

      You should know that many of my own posts get copied and posted elsewhere on Twitter or even other Publications. I don't go about making a scene with such rude comments.

      May be this is your bread and butter case. So, pls provide some necessary proof and I will mention your name. I don't want 10 more people standing up and claiming this is their poetry.

      And if you truly are the poet who has written this, I am very very happy to meet you here. It is an exceptional poem that brings out the real situation within Fauj.

      Thanks.

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  36. Replies
    1. At best, this poetry could be yours. I continue to be the owner of this Blog. :-D

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