Monday, September 16, 2013

मत बिकने दो यह लोकतंत्र



जो मूक बना सब देख रहा,
घुर्राया था वो एक बार,
अमरीका से पैसे लेकर,
किया लोकतंत्र पे उसने वार

इस लूटपाट के पीछे ताक़त,
बाहर से मिलती रही,
बिक रहा हमारा लोकतंत्र,
शह चोरों को मिलती रही

मत बिकने दो यह लोकतंत्र,
है पास तुम्हारे एक यंत्र,
चुनना अपना तुम प्रतिनिधी,
जनमत रक्षा का मूलमंत्र

समझो अपनी इस ताक़त को,
हमें बहला कर बेचें ये देश,
बन साधू फिर आनेवाले,
बच लो, देकर जन का आदेश

अब देंगे मुफ़्त में दारू ये,
ये सौदा है काफ़ी मँहगा,
ये आज दिखाते हाथ तुम्हें,
कल तुमको ही देंगे ठैंगा

जब बाकि बस लुटते रहे,
गुजरात वहीं आगे बढ़ा,
छत्तीस गढ़ और मध्य प्रदेश,
भी साथ चलें कंधा मिला

आगे मोदी, संग रमन सिंह,
शिवराज भी साथ में चलते हैं,
है भाजपा सरकार जहाँ,
वहाँ ऐसे नेता मिलते हैं

आने वाला है अब चुनाव,
छोड़ो अपने सब मनमुटाव,
शुभचिंतक अपनी भाजपा,
जीते भारत का हर चप्पा

4 comments:

  1. Very nice poetry bhaiya. This shows the actual picture of our present government's and country's conditions.

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  2. Rashmi Rathi, Kurukshetra roz hi kuchh panktiyan padh liya karta hoon. Ab aaapki kavita beech beech me padhne ko mile to Ramdhari Singh Dinkar ko thoda aaram kisi kisi din diya jaaye. Keep Writing. Wishes !!

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    1. Aaj hi Rashmi Rathi ki kuchh pannktiyan padhi...ab samajh mein aaya aap kya keh rahe the...aapka bahut dhanyavaad....

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